भेड़िए को अरबी में "ابن البار" कहा जाता है


भेड़िया वाहिद ऐसा जानवर है जो अपनी आज़ादी पर कभी समझौता नहीं करता, ना ही किसी का गुलाम बनता है, जबकि शेर समेत हर जानवर को गूलाम बनाया जा सकता है,,,,,!


भेड़िया मुर्दार जानवर को नहीं खाता और ना ही भेड़िया गैर महरम पर झांकता है, यानि बाकी जानवरों से बिल्कुल मुख़्तलिफ भेड़िया अपने परिवार की मादा भेडियो को शहवत की निगाह से देखता तक नहीं ,,,,!


अपनी शरीक ए हयात (जोड़ी) का इतना वफादार होता है कि उसके अलावा किसी और से ताल्लुक़ कायम नहीं करता..,,, इस तरह वो भी भेड़िए के साथ वफादारी करती है,,,, भेड़िया अपनी औलाद को पहचानता है क्योंकि उनके मां बाप एक ही होते हैं ,,,!


भेड़िए को अरबी में "ابن البار" कहा जाता है यानि कि 'नेक बेटा' , क्योंकि जब इसके वालैदैन बूढ़े हो जाते हैं तो ये उनके लिए शिकार करता है ,,,! वाहिद ऐसा जानवर है जो अपनी आज़ादी पर कभी समझौता नहीं करता, ना ही किसी का गुलाम बनता है, जबकि शेर समेत हर जानवर को गूलाम बनाया जा सकता है,,,,,!


भेड़िया मुर्दार जानवर को नहीं खाता और ना ही भेड़िया गैर महरम पर झांकता है, यानि बाकी जानवरों से बिल्कुल मुख़्तलिफ भेड़िया अपने परिवार की मादा भेडियो को शहवत की निगाह से देखता तक नहीं ,,,,!


अपनी शरीक ए हयात (जोड़ी) का इतना वफादार होता है कि उसके अलावा किसी और से ताल्लुक़ कायम नहीं करता..,,, इस तरह वो भी भेड़िए के साथ वफादारी करती है,,,, भेड़िया अपनी औलाद को पहचानता है क्योंकि उनके मां बाप एक ही होते हैं ,,,!


भेड़िए को अरबी में "ابن البار" कहा जाता है यानि कि 'नेक बेटा' , क्योंकि जब इसके वालैदैन बूढ़े हो जाते हैं तो ये उनके लिए शिकार करता है ,,,!


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