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Showing posts from October, 2022

यहां आपके #DhulHijjah

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  यहां आपके #DhulHijjah अच्छे कामों के ढेर में जोड़ने के लिए एक दिमाग ल ड़ाने वाली कार्रवाई है। 1440 मिनट में से लगभग 7 मिनट लगेंगे जो अल्लाह हमें रोज़ देता है। पैगंबर ﷺ ने कहा, "जो कोई दिन में सौ बार कहता है, 'ला इलाहा इल्लल्लाह, वहदाहु ला शारीका लाह, लाहुल मुल्कु वा लाहुल हमदु वा हुआ कुली शाय-इन कदीर', यह उसके लिए दस दासों को मुक्त करने के समान है। उसके लिए सौ अच्छे कर्म ( नेकी) लिखे जाते हैं और उससे सौ गलत कर्म (गुनाह) मिट जाते हैं, और यह उस दिन के लिए रात तक शैतान से सुरक्षा है। इससे बढ़कर कोई और उत्कृष्ट कार्य नहीं करता, सिवाय उसके जो उससे अधिक करता है ।" (मुवाट्टा') ➨➨➨➨➨➨➨➨➨➨➨➨➨➨➨➨➨➨➨➨➨➨ Here's a mind blowing action to add to your #DhulHijjah stack of good deeds. It will take about 7 minutes out of the 1440 minutes Allah blesses us with everyday. The Prophet ﷺ said, "Whoever says, 'Laa ilaaha illallaah, wahdahu laa shareeka lah, lahul mulku wa lahul hamdu wa huwa alaa kulli shay-in qadeer' one hundred times a day, it is the same for him as ...

Recite Qur’an: ⇆ कुरान का पाठ करें:

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  कुरान का पाठ करें: कुरान का पाठ करना सबसे अच्छे कार्यों में से एक है जिसे हम अल्लाह के करीब आने और उसकी खुशी पाने के लिए कर सकते हैं। पैगंबर (शांति उस पर हो) ने कहा, 'जो कोई अल्लाह की किताब से एक पत्र पढ़ता है, उसे इनाम मिलेगा। और वह इनाम दस से गुणा किया जाएगा। मैं यह नहीं कह रहा हूं कि "अलिफ, लाम, मीम" एक अक्षर है, बल्कि मैं कह रहा हूं कि "अलिफ" एक अक्षर है, "लाम" एक पत्र है और "मीम" एक पत्र है। [तिर्मिधि] सुभानअल्लाह, इन धन्य दिनों के दौरान प्रत्येक पत्र को पढ़ने से आपको मिलने वाले पुरस्कारों की कल्पना करें जब अल्लाह ने आपके इनाम को गुणा करने का वादा किया है! Recite Qur’an: Reciting the Qur’an is one of the best acts of worship we can perform to draw closer to Allah and seek his pleasure.  The Prophet (peace be upon him) said, ‘Whoever reads a letter from the Book of Allah, he will have a reward. And that reward will be multiplied by ten. I am not saying that “Alif, Laam, Meem” is a letter, rather I am saying that “Alif” is a letter...

🌿❣99 NAMES OF ALLĀH❣🌿⇄🌿❣99 अल्लाह के नाम❣🌿

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 ISLAMIC {Sabirrajput350}, [10/7/2022 5:00 AM] 🌿❣99 NAMES OF ALLĀH❣🌿 1. अर-रहमान (الرحمن) 2. अर-रहीम (الرحيم) द सर्व-दयालु 3. अल-मलिक (الملك) पूर्ण शासक 4. अल-कुद्दुस (القدوس) शुद्ध एक 5. अस-सलाम (السلام) शांति का स्रोत 6. अल-मुमीन (المؤمن) आस्था के प्रेरक 7. अल-मुहैमिन (المهيمن) द गार्जियन 8. अल-अज़ीज़ (العزيز) विजयी 9. अल-जब्बार (الجبار) द कंपेलर 10. अल-मुताकबीर (المتكبر) महानतम 11. अल-खलीक (الخالق) द क्रिएटर 12. अल-बारी' (البارئ) आदेश का निर्माता 13. अल-मुसाव्वीर (المصور) द शेपर ऑफ ब्यूटी 14. अल-गफ्फार (الغفار) क्षमाशील 15. अल-क़हर (القهار) द सबड्यूएर 16. अल-वहाब (الوهاب) अल्लाह का दाता 17. अर-रज्जाक (الرزاق) द सस्टेनर 18. अल-फ़तह (الفتاح) द ओपनर 19. अल-अलीम (العليم) सभी का ज्ञाता 20. अल-क़ाबिद (القابض) द कंस्ट्रिक्टर 21. अल-बसित (الباسط) द रिलीवर 22. अल-खफीद (الخافض) अबसेर 23. अर-रफ़ी (الرافع) 24. अल-मुइज़ (المعز) सम्मान के दाता 25. अल-मुदहिल (المذل) द ह्यूमिलिएटर 26. अस-सामी (السميع) सभी का सुनने वाला 27. अल-बसीर (البصير) सभी के द्रष्टा 28. अल-हकम ...

ज़िंदगी ऐसी बर्बादी क्यूँ है |

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ज़िंदगी इतनी तन्हा क्यूँ है जो भी मिला वो रुसवा क्यूँ है जब साथ साथ चले थे  कितने सपने पले थे  सोचा था हर रंग होगा वहाँ एक दूसरे का साथ होगा जहाँ सब तरफ़ फ़ूल ही फ़ूल खिलाएंगे बाग ही बाग ख़ुश्बू से भर जाएँगे राह तो ऐसी ही चली थी फिर क्यूँ काँटों की झड़ी थी सबका भला किया जब फिर क्यूँ ना फूल खिला तब मेरी ज़िंदगी ऐसी क्यूँ है ना सुलझे ऐसे पहेली क्यूँ है बड़ी बेदर्द नासाज़ी क्यूँ है ज़िंदगी ऐसी बर्बादी क्यूँ है ज़िंदगी ऐसी अजीब क्यूँ है ना सुलझे ऐसी जालसाज़ी क्यूँ है वक़्त बे वक़्त मुश्किलें देती क्यूँ है हर शक्स यहाँ तकलीफ़ में क्यूँ है जब बिन बुलाए भेजा यहाँ क्यूँ ना संग तू आया यहाँ क्या सोचे बनाकर मुझे उलझनों से घेरा तुझे अब देख ऊपर से मुझे पतझड़ में फेंका है तुझे अब राह खुद की खुद बना इस शहर ए जंगल से बाहर आ इक बार तू जल कर तो देख ख़ालिस स्वर्ण बन कर तो देख ये ज़िंदगी की पहेली है कभी हसीन कभी कँटीली है क्या कहा-ज़िंदगी इतनी गमगीन क्यूँ है आँख खोल कर देख पागल ये सोच हर चीज़ यहाँ हसीन क्यूँ है आँख जब तुने दी ही नहि ज़िंदगी रंगीन लगेगी नहीं रहम कर ए खुदा रहम कर इस बंदे को अब रुकस...

ہم نے اس ملک کی دھرتی سے محبت کی ہے

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  🦚🦜🦚🦜🦚🦜🦚🦜🦚🦜 *ملک   لٹ   جائے  گا  آثار   نظر   آتے  ہیں* *سارے  مسند نشیں   مکّار   نظر  آتے ہیں*  *ہم نے اس ملک کی دھرتی سے محبت کی ہے* *پھر بھی اندھوں کو ہم غدار نظر آتے ہیں* 🦚🦜🦚🦜🦚🦜🦚🦜🦚🦜 #mashaallah #islamic #sabirrajput350

भेड़िए को अरबी में "ابن البار" कहा जाता है

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भेड़िया वाहिद ऐसा जानवर है जो अपनी आज़ादी पर कभी समझौता नहीं करता, ना ही किसी का गुलाम बनता है, जबकि शेर समेत हर जानवर को गूलाम बनाया जा सकता है,,,,,! भेड़िया मुर्दार जानवर को नहीं खाता और ना ही भेड़िया गैर महरम पर झांकता है, यानि बाकी जानवरों से बिल्कुल मुख़्तलिफ भेड़िया अपने परिवार की मादा भेडियो को शहवत की निगाह से देखता तक नहीं ,,,,! अपनी शरीक ए हयात (जोड़ी) का इतना वफादार होता है कि उसके अलावा किसी और से ताल्लुक़ कायम नहीं करता..,,, इस तरह वो भी भेड़िए के साथ वफादारी करती है,,,, भेड़िया अपनी औलाद को पहचानता है क्योंकि उनके मां बाप एक ही होते हैं ,,,! भेड़िए को अरबी में "ابن البار" कहा जाता है यानि कि 'नेक बेटा' , क्योंकि जब इसके वालैदैन बूढ़े हो जाते हैं तो ये उनके लिए शिकार करता है ,,,! वाहिद ऐसा जानवर है जो अपनी आज़ादी पर कभी समझौता नहीं करता, ना ही किसी का गुलाम बनता है, जबकि शेर समेत हर जानवर को गूलाम बनाया जा सकता है,,,,,! भेड़िया मुर्दार जानवर को नहीं खाता और ना ही भेड़िया गैर महरम पर झांकता है, यानि बाकी जानवरों से बिल्कुल मुख़्तलिफ भेड़िया अपने परिवार की मा...